क्या होती है खप्पर पूजा और ये शिवरात्रि के अगले दिन क्यो की जाती है?????
शिव रात्रि में शिव खप्पर पूजा करना अति आवश्यक हे खप्पर पूजा शिव रात्रि के दूसरे दिन की जाती हे एवं पंचांग में भी इस त्योहार का समय दिया हे ( कुछ पंचांगों में नही दिया जाता ) शिव रात्रि पूजा खप्पर पूजा के बगैर अधूरी हे या ये कहें शिव रात्रि पूजा खप्पर पूजा के बगैर पूर्ण हो ही नही सकती।
शिव खप्पर पूजा करने पर आपके जीवन में भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों तरह का परिवर्तन परिलक्षित होगा I वह धन-धान्य, सुख-सौभाग्य से परिपूर्ण होकर श्रीवान एवं ऐश्वर्यवान बन जाता है I इसके साथ ही साथ आपके शत्रु का स्वत: ही शमन हो जायेगा।
शिव खप्पर पूजा तो जीवन को पूर्णता देने वाली होती है जिसके द्वारा साधक को एक के पश्चात् एक धन के स्त्रोत मिलने आरम्भ हो जाते हैं I अगर वह नौकरी पेशा है तो काई नया मार्ग मिल जाता है या पैतृक धन आदि के द्वारा धन प्राप्ति का नया मार्ग खुल जाता है।
व्यापारी है तो व्यापार में लाभ की स्थिति या नये व्यापार में लाभ की स्थिति बनती है या शेयर मार्केट में एकदम से लाभ मिल जाता है। कहने का तात्पर्य है कि धन प्राप्ति के इतने मार्ग या तो खुल जाते हैं या तो सूझने लगते हैं कि साधक आश्चर्यचकित रह जाता है।
जिस प्रकार आप आनंदयुक्त ऐसा ही जीवन आपको प्राप्त हो, और आपका जीवन निश्चिन्ता, निर्भिकता और ऐश्वर्य से परिपूर्ण हो। इस पूजा का प्रभाव पूजा आरम्भ करने से अनुभव होने लग जाता है। तन्त्र बाधाएँ स्वयं समाप्त होने लग जाती है, परिस्थितियों में अनुकूलता आने लग जाती है, शत्रु आपसे सहयोग करने लगता है और आप तीव्रता के साथ अपने लक्ष की ओर गतिशील होने लगते हैं।
शिव खप्पर पूजा के लिये सर्वप्रथम आपको प्रातः अपने घर पर योगी को आमंत्रित करना होगा ( मांस मदिरा का सेवन करने वाला योगी ना हो ) क्योंकि शिव की पूजा लेने का अधिकार सिर्फ सन्यासी और नाथ को ही हे क्योंकि शिव जी योगी नाथ थे और योगी शिव के लिये अपने पुत्र कार्तिकेय से भी अधिक प्यारा हे।
साधारण पूजा विधि - प्रातः काल एक शिव जी के नाम की ज्योत जलाएं ईशान कोण की तरफ मुख करके योग साधना की मुद्रा में बैठ जाएं एक पांच मुखी रुद्राक्ष लें गंगाजल से स्नान कराएं चन्दन का लेप करें रुद्राक्ष को अपने बाएं हाथ के ऊपर दाहें हाथ की हथेली पर रुद्राक्ष रख कर इक्षानुसार ॐ का जप करे जब तक आपकी इन्द्रियाँ चाहें या आप अपने प्रभु के लिये जितना समय दे सकते हें उतना दें।
पूजा संपन्न होने पर ( रुद्राक्ष को धारण भी कर सकते हें या धन के स्थान पर काले कपड़े में लपेट कर रख दें ) घर आये हुए योगी से डमरू नाद एवं शंख बजाने के लिये कहे जिससे घर का वातावरण शुद्ध होगा एवं हमारे भोले भंडारी भी अति प्रसन्न होंगे और वो जब योगी के द्वारा बजाए गये डमरू से प्रसन्न होते हें तो अवश्य ही साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हें।
आप योगी को अपनी इक्षानुसार भोजन कराएं एवं योगी से आशीर्वाद लेकर अपनी इक्षानुसार धन धान का दान देकर प्रेम पूर्वक विदा करें और जाते हुये योगी से कहें कि आप जल्दी आना । प्रभु श्री कृष्ण भी इस पूजा को विधि पूर्वक किया करते थे और यह प्रथा आज भी मथुरा छेत्र में प्रचलित हे। ब्राह्मण से लेकर सभी वर्ण के लोग शिव रात्रि पूजा को संपन्न करते हें। महायोगी बाबा भोले नाथ आपका कल्याण करें।
शिव रात्रि में शिव खप्पर पूजा करना अति आवश्यक हे खप्पर पूजा शिव रात्रि के दूसरे दिन की जाती हे एवं पंचांग में भी इस त्योहार का समय दिया हे ( कुछ पंचांगों में नही दिया जाता ) शिव रात्रि पूजा खप्पर पूजा के बगैर अधूरी हे या ये कहें शिव रात्रि पूजा खप्पर पूजा के बगैर पूर्ण हो ही नही सकती।
शिव खप्पर पूजा करने पर आपके जीवन में भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों तरह का परिवर्तन परिलक्षित होगा I वह धन-धान्य, सुख-सौभाग्य से परिपूर्ण होकर श्रीवान एवं ऐश्वर्यवान बन जाता है I इसके साथ ही साथ आपके शत्रु का स्वत: ही शमन हो जायेगा।
शिव खप्पर पूजा तो जीवन को पूर्णता देने वाली होती है जिसके द्वारा साधक को एक के पश्चात् एक धन के स्त्रोत मिलने आरम्भ हो जाते हैं I अगर वह नौकरी पेशा है तो काई नया मार्ग मिल जाता है या पैतृक धन आदि के द्वारा धन प्राप्ति का नया मार्ग खुल जाता है।
व्यापारी है तो व्यापार में लाभ की स्थिति या नये व्यापार में लाभ की स्थिति बनती है या शेयर मार्केट में एकदम से लाभ मिल जाता है। कहने का तात्पर्य है कि धन प्राप्ति के इतने मार्ग या तो खुल जाते हैं या तो सूझने लगते हैं कि साधक आश्चर्यचकित रह जाता है।
जिस प्रकार आप आनंदयुक्त ऐसा ही जीवन आपको प्राप्त हो, और आपका जीवन निश्चिन्ता, निर्भिकता और ऐश्वर्य से परिपूर्ण हो। इस पूजा का प्रभाव पूजा आरम्भ करने से अनुभव होने लग जाता है। तन्त्र बाधाएँ स्वयं समाप्त होने लग जाती है, परिस्थितियों में अनुकूलता आने लग जाती है, शत्रु आपसे सहयोग करने लगता है और आप तीव्रता के साथ अपने लक्ष की ओर गतिशील होने लगते हैं।
शिव खप्पर पूजा के लिये सर्वप्रथम आपको प्रातः अपने घर पर योगी को आमंत्रित करना होगा ( मांस मदिरा का सेवन करने वाला योगी ना हो ) क्योंकि शिव की पूजा लेने का अधिकार सिर्फ सन्यासी और नाथ को ही हे क्योंकि शिव जी योगी नाथ थे और योगी शिव के लिये अपने पुत्र कार्तिकेय से भी अधिक प्यारा हे।
साधारण पूजा विधि - प्रातः काल एक शिव जी के नाम की ज्योत जलाएं ईशान कोण की तरफ मुख करके योग साधना की मुद्रा में बैठ जाएं एक पांच मुखी रुद्राक्ष लें गंगाजल से स्नान कराएं चन्दन का लेप करें रुद्राक्ष को अपने बाएं हाथ के ऊपर दाहें हाथ की हथेली पर रुद्राक्ष रख कर इक्षानुसार ॐ का जप करे जब तक आपकी इन्द्रियाँ चाहें या आप अपने प्रभु के लिये जितना समय दे सकते हें उतना दें।
पूजा संपन्न होने पर ( रुद्राक्ष को धारण भी कर सकते हें या धन के स्थान पर काले कपड़े में लपेट कर रख दें ) घर आये हुए योगी से डमरू नाद एवं शंख बजाने के लिये कहे जिससे घर का वातावरण शुद्ध होगा एवं हमारे भोले भंडारी भी अति प्रसन्न होंगे और वो जब योगी के द्वारा बजाए गये डमरू से प्रसन्न होते हें तो अवश्य ही साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हें।
आप योगी को अपनी इक्षानुसार भोजन कराएं एवं योगी से आशीर्वाद लेकर अपनी इक्षानुसार धन धान का दान देकर प्रेम पूर्वक विदा करें और जाते हुये योगी से कहें कि आप जल्दी आना । प्रभु श्री कृष्ण भी इस पूजा को विधि पूर्वक किया करते थे और यह प्रथा आज भी मथुरा छेत्र में प्रचलित हे। ब्राह्मण से लेकर सभी वर्ण के लोग शिव रात्रि पूजा को संपन्न करते हें। महायोगी बाबा भोले नाथ आपका कल्याण करें।
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