चमत्कारिक कनिपक्कम गणपति मंदिर जहाँ लगातार बढ़ रहा है मूर्ति का आकार
चित्तूर , आन्ध्रप्रदेशका का एक जिला है यहाँ का विघ्नहर्ता कनिपक्कम गणपति मंदिर बाकि सब मंदिरों से अपने आप में अनूठा है क्योंकि , एक तो ये विशाल मंदिर नदी के बीचों बीच स्थित है और दूसरा यहाँ स्थित गणपतिजी की मूर्ति का आकार लगातार बढ़ रहा है। कहा जाता है कि यहाँ आने वाले हर भक्त के पाप को विघ्नहर्ता हर लेते हैं। मंदिर के बनने की कहानी भी बेहद रोचक है , कहा जाता है कि तीन भाई थे। उनमें से एक गूंगा , दूसरा बहरा और तीसरा अंधा था। तीनों ने मिलकर अपने जीवन व्यापन के लिए जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा खरीदा। जमीन पर खेती के लिए पानी की जरुरत थी। इसलिए तीनों ने उस कुंए को खोदना शुरू किया जो सूख चुका था।काफी खोदने के बाद पानी निकला उसके बाद थोड़ा और खोदने पर एक पत्थर दिखाई दिया। जिसे हटाने पर खून की धारा निकलने लगी। थोड़ी ही देर में पूरे कुंए का पानी लाल हो गया। यह चमत्कार होते ही तीनों भाई जो कि गूंगे , बेहरे व अंधे थे , वे एकदम ठीक हो गए। जब ये खबर उस गाँव में रहने वाले लोगों तक पहुँची तो वे सभी यह चमत्कार देखने के लिए एकत्रित होने लगे। तभी सभी को वहाँ प्रकट स्वयं भू गणेशजी की मूर्ति दिखाई दी , जिसे वहीं पानी के बीच ही स्थापित कर दिया गया ।यहाँ के लोगों का मानना है कि प्रतिदिन गणपति की ये मूर्ति अपना आकार बढ़ा रही है।इस बात का प्रमाण उनका पेट और घुटना है , जो बड़ा आकार लेता जा रहा है। कहा जाता है कि विनायक को एक भक्त श्री लक्ष्माम्मा ने एक कवच भेंट किया था , लेकिन प्रतिमा का आकार बढ़ऩे की वजह से अब उसे पहनाना मुश्किल हो गया है।कहा जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को भगवान से अपने पाप कर्मों की क्षमा मांगनी है तो उसे यहाँ स्थित नदी में स्नान करके ये प्रण लेना होगा कि वह फिर कभी उस तरह का पाप नहीं करेगा , जिसके लिए वह क्षमा मांगने आया है। ऐसा प्रण करने के बाद गणेश जी के दर्शन करने से सारे पाप दूर हो जाते हैं।
माना जाता है कि इस नियम का पालन करने पर ही उस व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं।हैदराबाद से सड़क मार्ग से चित्तूर पहुंचा जा सकते है। चित्तूर , हैदराबाद से 581, तिरुपति से 70 , चेन्नई से 161, कांचीपुरम से 91, वेल्लोर से 31 कि.मी. दूर स्थित है ।
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